Class 12 Political Science Chapter 8 पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन Solutions 2026–27
Class 12 Political Science Chapter 8 पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन Solutions 2026–27 कक्षा 12वीं के विद्यार्थियों के लिए सरल, स्पष्ट और परीक्षा-केंद्रित तरीके से तैयार किया गया अध्ययन सामग्री है। इस अध्याय में पर्यावरण की राजनीति, प्राकृतिक संसाधनों का महत्व, वैश्विक पर्यावरणीय समस्याएं, संसाधनों पर संघर्ष और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों को आसान हिंदी में समझाया गया है।
यहां अध्याय से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न और Revision Materials दिए गए हैं, ताकि विद्यार्थी विषय को आसानी से समझ सकें और परीक्षा की तैयारी बेहतर तरीके से कर सकें।
📚 यहां क्या-क्या मिलेगा?
- 📖 Chapter 8 के महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर
- ⭐ परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न
- 📝 लघु और दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
- 🌱 पर्यावरण से जुड़े महत्वपूर्ण विषय
- 🌍 वैश्विक पर्यावरणीय समस्याएं
- 💧 प्राकृतिक संसाधनों का महत्व
- ⛏️ संसाधनों के उपयोग और वितरण से जुड़े प्रश्न
- ♻️ सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण
- 🤝 पर्यावरण संबंधी अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
- 📚 Quick Revision Materials
- 🎯 2026–27 परीक्षा की तैयारी
🌱 पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन: मुख्य विषय
पर्यावरण मानव जीवन और समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जल, वन, भूमि, खनिज और ऊर्जा जैसे प्राकृतिक संसाधन मानव जीवन और आर्थिक विकास के लिए आवश्यक हैं। लेकिन इनका अत्यधिक उपयोग पर्यावरणीय समस्याओं को बढ़ा सकता है।
इस अध्याय में वैश्विक पर्यावरणीय संकट, प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण, संसाधनों के असमान वितरण, पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरणीय समझौतों जैसे महत्वपूर्ण विषयों का अध्ययन किया जाता है।
🎯 परीक्षा की तैयारी को आसान बनाएं
इस अध्याय की तैयारी करते समय पर्यावरणीय समस्याओं के कारण, प्रभाव और समाधान को समझना महत्वपूर्ण है। प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग और संरक्षण से जुड़े प्रमुख विचारों को उदाहरणों के साथ पढ़ने से परीक्षा में उत्तर अधिक प्रभावी ढंग से लिखने में मदद मिलती है।
Class 12 Political Science Chapter 8 पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन Solutions 2026–27 के माध्यम से विद्यार्थी अध्याय के महत्वपूर्ण प्रश्नों का अभ्यास कर सकते हैं और परीक्षा से पहले प्रभावी Revision कर सकते हैं।
🌟 सरल भाषा में तैयार अध्ययन सामग्री
इस अध्याय की सामग्री सरल, स्पष्ट और विद्यार्थियों के लिए आसानी से समझने योग्य भाषा में तैयार की गई है। अध्याय के मुख्य concepts और परीक्षा के लिए उपयोगी topics को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत किया गया है, ताकि विद्यार्थी विषय को अच्छी तरह समझ सकें और अपनी तैयारी मजबूत कर सकें।
यह सामग्री Class Test, Unit Test, Pre-Board और Class 12 Final Examination 2026–27 की तैयारी के लिए उपयोगी है।
भाग-क (Part-A) समकालीन विश्व राजनीति (Contemporary World Politics)
Class 12 Political Science Chapter 8 पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन
चयनित प्रश्न एवं उत्तर (Selected Questions & Answers)
अति लघु प्रश्न और उत्तर (Very Short Questions-Answers / Marks: 1 Each)
(a) पर्यावरण (Environment) से क्या अभिप्राय है?
उत्तरः पर्यावरण (Environment) से अभिप्राय जल (water), वायु (air), भूमि (land) तथा इन तत्वों के बीच पारस्परिक संबंध (interrelationship) से है, जिसमें अन्य जीवित प्राणी जैसे पशु (animals) और जीव (organisms) भी शामिल होते हैं।
(b) प्राकृतिक संसाधन (Natural Resources) क्या हैं?
उत्तरः प्राकृतिक संसाधन (Natural Resources) वे संसाधन हैं जो प्राकृतिक पर्यावरण (natural environment) से प्राप्त किए जा सकते हैं।
(c) विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) किस तिथि को मनाया जाता है?
उत्तर: 5 जून (June) |
(d) पर्यावरण प्रदूषण (environmental pollution) का एक कारण बताइए।
उत्तर: औद्योगीकरण (Industrialization) |
(e) पर्यावरण पर स्टॉकहोम सम्मेलन (Stockholm Conference on the Environment) कब आयोजित हुआ था?
उत्तर: 1972 में।
(f) भारत (India) ने क्योटो प्रोटोकॉल (Kyoto Protocol) पर कब हस्ताक्षर किए? H.S. ’13
उत्तरः अगस्त (August) 2002 में।
(g) रियो सम्मेलन (Rio Conference) कब आयोजित हुआ था?
उत्तर: 1992 में।
(h) पर्यावरण संरक्षण (environmental protection) से संबंधित किसी एक आंदोलन का नाम बताइए।
उत्तरः चिपको आंदोलन (Chipko Movement) |
(i) भारतीय संविधान (Indian Constitution) का कौन-सा अनुच्छेद (Article) सरकार को पर्यावरण, वन और वन्यजीवों की रक्षा और सुधार का निर्देश देता है?
उत्तरः अनुच्छेद 48A (Article 48A)1
(j) संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा अभिसमय (United Nations Framework Convention on Climate Change – UNFCCC) को किस वर्ष अपनाया गया था?
उत्तर: 1992 में।
(k) 1987 में सतत विकास (sustainable development) को किस आयोग (commission) ने परिभाषित किया? H.S. 17, 19
उत्तर: ब्रंटलैंड आयोग (Brundtland Commission) |
(l) क्योटो प्रोटोकॉल (Kyoto Protocol) क्या है? यह किस पर्यावरणीय समस्या से संबंधित है?
उत्तरः क्योटो प्रोटोकॉल (Kyoto Protocol) एक अंतरराष्ट्रीय संधि (international treaty) है, जो औद्योगिक देशों (industrialized countries) के लिए ग्रीनहाउस गैस (greenhouse gas) उत्सर्जन को कम करने के बाध्यकारी लक्ष्य निर्धारित करती है। यह जलवायु परिवर्तन (climate change) की समस्या से संबंधित है।
(m) “अर्थ समिट” (Earth Summit) क्या है?
उत्तरः जून (June) 1992 में ब्राज़ील (Brazil) के रियो डी जेनेरो (Rio de Janeiro) में आयोजित संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण और विकास सम्मेलन (United Nations Conference on Environment and Development) को अर्थ समिट (Earth Summit) कहा जाता है।
(n) निम्नलिखित कथन सत्य (True) है या असत्य (False): “रियो सम्मेलन (Rio Conference) ने ‘एजेंडा 21 (Agenda 21)’ नामक कार्ययोजना को अपनाया।”
उत्तरः सत्य (True) |
(0) UNEP का पूर्ण रूप (full form) क्या है?
उत्तरः संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (United Nations Environment Programme) |
(p) UNFCCC का पूर्ण रूप (full form) क्या है?
उत्तरः संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा अभिसमय (United Nations Framework Convention on Climate Change) |
(q) प्रथम विश्व (First World) को क्या कहा जाता है?
उत्तरः वैश्विक उत्तर (Global North)।
(r) 1992 के अर्थ समिट (Earth Summit) में कितने देशों ने भाग लिया था?
उत्तर: 170 देश (countries) |
(s) 21-बिंदु कार्यक्रम (21-point programme) क्या है? H.S. ’14
उत्तर: 1992 में रियो डी जेनेरो (Rio de Janeiro) में आयोजित अर्थ समिट (Earth Summit) में जलवायु परिवर्तन (climate change), जैव विविधता (biodiversity), वनीकरण (afforestation) आदि विषयों पर 21 प्रमुख प्रस्ताव (proposals) अपनाए गए थे। इसे 21-बिंदु कार्यक्रम (Agenda 21) कहा जाता है।
(t) स्वदेशी लोगों की विश्व परिषद (World Council of Indigenous Peoples) की स्थापना किस वर्ष हुई थी?
उत्तर: 1975 में।
(u) ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (greenhouse gas emission) से क्या अभिप्राय है? H.S. 119
उत्तर: कार्बन डाइऑक्साइड (carbon dioxide), मीथेन (methane), हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (hydrofluorocarbons) आदि गैसें, जो देशों द्वारा स्थापित उद्योगों (industries) से उत्सर्जित होती हैं, वायुमंडल (atmosphere) के तापमान को बढ़ाती हैं। इन गैसों के उत्सर्जन को ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (greenhouse gas emission) कहा जाता है।
(v) रिक्त स्थान भरिए (Fill in the blank): The Earth Summit was held in year in the
उत्तर: रियो डी जेनेरो (Rio de Janeiro), 19921
(w) ग्रीनहाउस गैसें (greenhouse gases) क्या हैं? H.S. ’15
उत्तरः ग्रीनहाउस गैसें (greenhouse gases) वे गैसें हैं, जैसे कार्बन डाइऑक्साइड (carbon dioxide), मीथेन (methane) और हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (hydrofluorocarbons), जो मुख्यतः औद्योगिक गतिविधियों (industrial activities) से उत्सर्जित होती हैं और वैश्विक तापन (global warming) में योगदान करती हैं।
लघु प्रश्न और उत्तर (Short Questions and Answers): (Marks: 2 each)
(a) सामूहिक संपत्ति संसाधन (common property resources) से क्या अभिप्राय है?
उत्तरः सामूहिक संपत्ति संसाधन (common property resources) वे संसाधन होते हैं जिनका उपयोग या उपभोग किसी समूह (group), समुदाय (community) या समाज (society) द्वारा सामूहिक रूप से किया जाता है। उदाहरण के लिए नदियाँ (rivers), झीलें (lakes), पर्वत (mountains) और उद्यान (parks)1
(b) स्वदेशी लोग (indigenous people) से क्या अभिप्राय है?
उत्तरः संयुक्त राष्ट्र (United Nations) द्वारा दी गई परिभाषा के अनुसार, स्वदेशी लोग (indigenous people) वे हैं जो किसी क्षेत्र (territory) के मूल निवासी (original inhabitants) के वंशज होते हैं और बाद में अन्य भागों से आए भिन्न संस्कृतियों (different cultures) या जातीय समूहों (ethnic groups) के लोगों द्वारा प्रभुत्व में लाए गए या विस्थापित (displaced) किए गए।
(c) वैश्विक तापन (global warming) के लिए उत्तरदायी दो गैसों के नाम बताइए।
उत्तर: कार्बन डाइऑक्साइड (carbon dioxide) और मीथेन (methane) 1
(d) वैश्विक साझी संपत्तियों (global commons) के दो उदाहरण दीजिए। H.S. ’13
उत्तर:
(1) पृथ्वी की जलवायु (Earth’s climate)
(2) अंटार्कटिका महाद्वीप (continent of Antarctica)
(e) संसाधनों की भू-राजनीति (geopolitics of resources) से क्या अभिप्राय है? विश्व राजनीति (world politics) में महत्वपूर्ण दो संसाधनों के नाम बताइए।
उत्तरः संसाधनों की भू-राजनीति (geopolitics of resources) से अभिप्राय इस बात की राजनीति (politics) से है कि वैश्विक संसाधनों (global resources) का नियंत्रण (control) किसके पास है, कितना है, कहाँ है और किस प्रकार उपयोग किया जाता है।
उदाहरण के रूप में भारत (India) और बांग्लादेश (Bangladesh) के बीच फरक्का बैराज (Farakka Barrage) विवाद तथा भारत के राज्यों तमिलनाडु (Tamil Nadu) और कर्नाटक (Karnataka) के बीच कावेरी नदी (Cauvery River) विवाद शामिल हैं।
विश्व राजनीति में दो महत्वपूर्ण संसाधन हैं- खनिज तेल (mineral oil/petroleum) और जल (water) |
(f) पर्यावरणीय मुद्दे (environmental issues) विश्व राजनीति (world politics) में महत्वपूर्ण क्यों हो गए हैं?
उत्तरः पर्यावरणीय मुद्दे (environmental issues) विश्व राजनीति (world politics) में महत्वपूर्ण हो गए हैं क्योंकि पर्यावरणीय क्षरण (environmental degradation) मानव सभ्यता (human civilization) के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करता है। वैश्विक तापन (global warming), सूखा (drought) और जलवायु परिवर्तन (climate change) जैसी समस्याएँ पर्यावरण के ह्रास के कारण उत्पन्न हुई हैं।
मध्यम-लंबाई के प्रश्न और उत्तर (Medium-Length Questions and Answers):
(a) वैश्विक साझी संपत्तियाँ (global commons) क्या हैं? इनके संरक्षण के दो उपाय बताइए। H.S. ’17
या
“सामान्य किन्तु विभेदित उत्तरदायित्व” (common but differentiated responsibilities) से क्या अभिप्राय है? संक्षेप में चर्चा कीजिए।
उत्तरः वैश्विक साझी संपत्तियाँ (global commons) वे संसाधन हैं जिनका उपयोग या उपभोग सभी द्वारा सामूहिक रूप से किया जाता है, जैसे नदियाँ (rivers), झीलें (lakes), पर्वत (mountains), उद्यान (parks) तथा वैश्विक जलवायु (global climate) ।
इन संसाधनों के संरक्षण के दो उपाय हैं-
(1) वैश्विक उत्तर (Global North) और वैश्विक दक्षिण (Global South) के देशों के बीच पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान हेतु सहयोग (cooperation) और सहमति (consensus) स्थापित करना।
(2) तटीय (coastal) और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील (ecologically sensitive) क्षेत्रों में प्रदूषण (pollution) तथा जनसंख्या दबाव (population pressure) को कम करना।
विकसित देश (developed countries) पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान में सभी राष्ट्रों की समान जिम्मेदारी (equal responsibility) पर बल देते हैं। परंतु विकासशील देश (developing countries) यह तर्क देते हैं कि वे कम औद्योगीकृत (less industrialized) हैं, अतः पर्यावरणीय क्षरण (environmental degradation) में उनका योगदान कम है; इसलिए विकसित देशों को अधिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए। यह सिद्धांत 1992 के रियो सम्मेलन (Rio Conference) में “सामान्य किन्तु विभेदित उत्तरदायित्व” (common but differentiated responsibilities) के रूप में स्वीकार किया गया।
(b) रियो सम्मेलन (Rio Conference) के निर्णय या परिणाम क्या थे?
उत्तरः संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण और विकास सम्मेलन (United Nations Conference on Environment and Development) जून (June) 1992 में रियो डी जेनेरो (Rio de Janeiro) में आयोजित हुआ था। इसके प्रमुख
परिणाम निम्नलिखित थे-
(1) देशों ने वैश्विक पर्यावरण (global environment) की रक्षा (protection), संरक्षण (conservation) और सुधार (improvement) हेतु सहयोग करने पर सहमति व्यक्त की।
(2) पर्यावरण संरक्षण (environmental protection) के लिए राष्ट्रों के बीच विभेदित उत्तरदायित्व (differentiated responsibilities) को मान्यता दी गई।
(3) एजेंडा 21 (Agenda 21) को अपनाया गया, जिसमें जनसंख्या वृद्धि (population growth) को नियंत्रित करने, वायुमंडल (atmosphere) की रक्षा, वनों की कटाई (deforestation) को रोकने तथा जैव विविधता
(biodiversity) के संरक्षण जैसे उपाय शामिल थे।
(c) विश्व राजनीति (world politics) के संदर्भ में वैश्विक पर्यावरणीय मुद्दों को नियंत्रित करने में संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की क्या भूमिका रही है?
उत्तरः संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने वैश्विक पर्यावरणीय मुद्दों (global environmental issues) के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अपने पर्यावरणीय कार्यक्रमों (environmental programmes) के अंतर्गत इसने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों (international conferences) का आयोजन किया तथा पर्यावरणीय समस्याओं पर व्यापक अध्ययन (studies) कर प्रभावी समाधान खोजने का प्रयास किया।
1972 में स्टॉकहोम सम्मेलन (Stockholm Conference) संयुक्त राष्ट्र की पहल पर आयोजित किया गया। 1992 में रियो डी जेनेरो (Rio de Janeiro) में अर्थ समिट (Earth Summit) आयोजित हुआ।
इसके बाद क्योटो प्रोटोकॉल (Kyoto Protocol) को संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा अभिसमय (UNFCCC) के अंतर्गत अपनाया गया।
टिप्पणी (Note): क्योटो प्रोटोकॉल (Kyoto Protocol) 1997 में जापान (Japan) के क्योटो (Kyoto) में अपनाया गया था, न कि सीधे 1992 के रियो सम्मेलन में।
(d) स्वदेशी लोगों (indigenous people) के अधिकारों की रक्षा के लिए उठाए गए कुछ उपायों का उल्लेख कीजिए।
उत्तरः संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की परिभाषा के अनुसार, स्वदेशी लोग (indigenous people) वे हैं जो किसी क्षेत्र के मूल निवासी (original inhabitants) के वंशज होते हैं और बाद में अन्य लोगों द्वारा प्रभुत्व में लाए गए। उनके अधिकारों की रक्षा के लिए निम्नलिखित उपाय किए गए हैं-
(1) कुछ देशों में अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribes) जैसे संवैधानिक प्रावधानों (constitutional provisions) में उन्हें शामिल कर न्याय सुनिश्चित किया गया है।
(2) नौकरियों में आयु सीमा (age limit) में छूट तथा विशेष सरकारी भत्तों (government allowances) जैसे संवैधानिक संरक्षण (constitutional safeguards) प्रदान किए गए हैं।
(3) परिवहन (transport) और संचार (communication) व्यवस्थाओं का विकास कर समझ (understanding) और एकीकरण (integration) को बढ़ावा दिया गया है।
(e) स्वदेशी लोगों (indigenous people) के अधिकारों और पर्यावरण (environment) के बीच संबंध को संक्षेप में स्पष्ट कीजिए। H.S. ’18, ’20
उत्तरः स्वदेशी लोग (indigenous people) पर्यावरण (environment) के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखते हैं क्योंकि उनकी आजीविका (livelihood) मुख्यतः प्रकृति (nature) पर निर्भर करती है। उनका जीवन-शैली (lifestyle) सामान्यतः सरल होती है और पर्यावरण के लिए कम हानिकारक होती है। उनकी संस्कृति (culture), परंपराएँ (customs), सामाजिक प्रथाएँ (social practices) तथा बसावट (settlement patterns) पर्यावरण के अनुकूल होती हैं।
परंतु विकसित (developed) या विकासशील (developing) क्षेत्रों से प्रवासन (migration) के कारण अक्सर उनके अधिकारों में कमी आई है और पर्यावरणीय क्षरण (environmental degradation) बढ़ा है।
इसलिए विभिन्न देशों में उनके अधिकारों की रक्षा के लिए संवैधानिक (constitutional) और प्रशासनिक (administrative) उपाय किए गए हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions): (Marks: 6 each)
(a) क्योटो प्रोटोकॉल (Kyoto Protocol) क्या है? व्याख्या कीजिए।
उत्तर: दिसंबर (December) 1997 में जापान (Japan) के क्योटो (Kyoto) में जलवायु परिवर्तन (climate change) पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें लगभग 150 देशों ने भाग लिया। इस सम्मेलन में पारित प्रस्तावों (resolutions) को क्योटो प्रोटोकॉल (Kyoto Protocol) कहा जाता है। इसके मुख्य प्रावधान निम्नलिखित थे-
(1) औद्योगिक देशों (industrialized countries) ने 2008-2012 की अवधि में 1990 के स्तर से औसतन 5.2 प्रतिशत तक ग्रीनहाउस गैस (greenhouse gas) उत्सर्जन को कम करने पर सहमति व्यक्त की। संयुक्त राज्य अमेरिका (United States) को 7 प्रतिशत, यूरोपीय संघ (European Union) को 8 प्रतिशत, कनाडा (Canada) को 6 प्रतिशत और जापान (Japan) को 6 प्रतिशत कमी करनी थी।
यद्यपि संयुक्त राज्य अमेरिका (United States) ने इस पर हस्ताक्षर किए, परंतु उसने इसे अनुमोदित (ratify) नहीं किया, इसलिए वह कानूनी रूप से बाध्य नहीं था।
(2) विकासशील देशों (developing countries) को बाध्यकारी लक्ष्य (binding targets) से छूट दी गई, परंतु उनसे उत्सर्जन नियंत्रण (emission control) के उपाय करने की अपेक्षा की गई।
(3) उत्सर्जन में कमी के लक्ष्य 2008 से 2012 के बीच प्राप्त किए जाने थे।
(b) पर्यावरणीय मुद्दों (environmental issues) में भारत (India) की भूमिका पर टिप्पणी लिखिए।
या
वैश्विक पर्यावरणीय बहसों (global environmental debates) में भारत (India) की स्थिति की चर्चा कीजिए। H.S. 16
उत्तर: भारत (India) ने पर्यावरणीय मुद्दों (environmental issues) को गंभीरता से लिया है। भारतीय संविधान (Indian Constitution) के मौलिक कर्तव्यों (Fundamental Duties) तथा राज्य के नीति निदेशक तत्वों (Directive Principles of State Policy) में पर्यावरण संरक्षण (environmental protection) पर बल दिया गया है।
भारत सरकार (Government of India) ने अनेक पर्यावरणीय कानून बनाए हैं, जैसे- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act, 1972), वन संरक्षण अधिनियम (Forest Conservation Act, 1980), जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम (Water (Prevention and Control of Pollution) Act, 1974) तथा वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम (Air (Prevention and Control of Pollution) Act, 1981)1
भारत (India) ने 2002 में क्योटो प्रोटोकॉल (Kyoto Protocol) पर हस्ताक्षर किए। 2009 के कोपेनहेगन जलवायु सम्मेलन (Copenhagen Climate Conference) में भारत ने समानता (equity) तथा सामान्य किन्तु विभेदित उत्तरदायित्व (common but differentiated responsibilities) पर जोर देते हुए दृढ़ रुख अपनाया।
भारत (India) ने स्वच्छ ईंधन (clean fuel) नीतियाँ लागू करने, ऊर्जा संरक्षण अधिनियम (Energy Conservation Act, 2001) तथा विद्युत अधिनियम (Electricity Act, 2003) जैसे कदम उठाए हैं। नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) के क्षेत्र में भारत अग्रणी देशों में शामिल है।
(c) समकालीन राजनीति (contemporary politics) में तेल (oil) और जल (water) के महत्व का वर्णन कीजिए।
उत्तरः समकालीन विश्व राजनीति (world politics) में तेल (oil) और जल (water) का विशेष महत्व है। तेल (oil) अपनी आवश्यक प्रकृति (essential nature) तथा परिवहन में सुविधा (ease of transport) के कारण 20वीं सदी की वैश्विक अर्थव्यवस्था (global economy) का केंद्र बन गया। वैश्विक परिवहन (global transportation) के लिए आवश्यक ईंधन का लगभग 95 प्रतिशत भाग पेट्रोलियम (petroleum) से प्राप्त होता है। औद्योगिक देश (industrialized countries) तेल पर अत्यधिक निर्भर हैं।
तेल संसाधनों (oil resources) पर नियंत्रण को लेकर देशों के बीच संघर्ष (conflicts), विवाद (disputes) और युद्ध (wars) हुए हैं, जैसे- संयुक्त राज्य अमेरिका (United States) द्वारा इराक (Iraq) पर आक्रमण, इराक (Iraq) द्वारा कुवैत (Kuwait) पर आक्रमण तथा ईरान-इराक युद्ध (Iran-Iraq War)। इसलिए कहा जाता है कि तेल का इतिहास (history of oil) संघर्ष का इतिहास है।
जल (water) जीवन (life) का पर्याय है और अस्तित्व (survival) की मूल शर्त है। यद्यपि पृथ्वी (Earth) की सतह का लगभग 71 प्रतिशत भाग जल से ढका है, परंतु इसका केवल एक छोटा भाग ही पेयजल (drinking water) के रूप में उपयोग योग्य है। मीठे जल (freshwater) की उपलब्धता तेजी से घट रही है।
रिपोर्टों के अनुसार, 2050 तक सूखा (drought) की स्थिति व्यापक हो सकती है और जलवायु परिवर्तन (climate change) के कारण विकासशील देशों (developing countries) में लाखों लोग विस्थापित हो सकते हैं। जल संकट (water scarcity) भविष्य में एक गंभीर चुनौती और संघर्ष का कारण बन सकता है। कुछ विचारकों का मानना है कि भविष्य के युद्ध जल के लिए लड़े जा सकते हैं।
(d) संसाधनों की भू-राजनीति (geopolitics of resources) की समालोचनात्मक व्याख्या कीजिए। H.S. ’15
उत्तरः संसाधनों की भू-राजनीति (geopolitics of resources) से अभिप्राय वैश्विक संसाधनों (global resources) के नियंत्रण (control), वितरण (distribution) और उपयोग (utilization) से संबंधित राजनीति (politics) से है। उदाहरण के लिए भारत (India) और बांग्लादेश (Bangladesh) के बीच फरक्का बैराज (Farakka Barrage) विवाद तथा तमिलनाडु (Tamil Nadu) और कर्नाटक (Karnataka) के बीच कावेरी नदी (Cauvery River) विवाद संसाधन-आधारित संघर्षों (resource-based conflicts) को दर्शाते हैं।
विश्व राजनीति (world politics) में दो प्रमुख संसाधन पेट्रोलियम (petroleum) और जल (water) हैं। इसके अतिरिक्त कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जो किसी एक राज्य (state) के अधीन नहीं हैं, जैसे अंटार्कटिका (Antarctica), वैश्विक जलवायु प्रणाली (global climate system), ध्रुवीय क्षेत्र (polar regions) और बाह्य अंतरिक्ष (outer space)। इन्हें वैश्विक साझी संपत्तियाँ (global commons) माना जाता है और इनका सामूहिक प्रबंधन (collective management) आवश्यक है।
अंतरराष्ट्रीय समझौते (international agreements) जैसे अंटार्कटिक संधि (Antarctic Treaty, 1959), मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (Montreal Protocol, 1987) तथा अंटार्कटिक संधि पर पर्यावरण संरक्षण प्रोटोकॉल (Protocol on Environmental Protection to the Antarctic Treaty, 1991) इन संसाधनों के प्रबंधन में सहयोगात्मक प्रयासों (cooperative efforts) को दर्शाते हैं।
